एक लम्हे बाद।

एक लम्हे बाद ऐसा लगता है
की हमने पा लिया है कुछ मर्दों
का साथ..
हमारे किये हुए संघर्ष से
अब मानो लगता है कि
औरतों पर कुछ कम
होंगे अपराध..
पर क्या कुछ बदला है यहां?
शायद नहीं..
कुछ जख्मो ने हमे ये बात दिला
दी याद।

जिन रास्तों पे हमारा अपमान
किया था..
जहा हमारे अस्तित्व का तिरस्कार
किया था…
आज वही लोग हमारी प्रशंसा के
पुल बांध रहे है..
जिन्होने कभी हमारी आत्मा का वहा
बलातकार किया था..
एक लम्हे के बाद, इनकी यह सारी
रणनीतियाँ अब लगती है वाहियाद.

इन्होंने अपने राज में हम पर बहुत
जुल्म ढाए..
अपने लिए गए फैसलों में इन्होंने
हमारी कभी नहीं मांगी राय..
अब जब वक़्त हमारा है, तो इनकी
निकल रही है हाय-हाय..
पर हमे नहीं करनी किसी से भी
यहां लड़ाई..
जिस तरह कभी हम किया करते
थे..
आज एक लम्हे के बाद ये मर्द कर रहे
है हमारी फ़रियाद.

आज नर और नारी दोनों एक
बराबर खड़े है..
लेकिन कुछ ऐसे भी है जो अपनी
खोकली प्रतिमा को बरकरार रखने
के लिए अडे है..
पर हमे इनसे कोई बैर नहीं, क्यूंकि
हमारे मुताबिक औरत और मर्द
का रिश्ता इन सारे भेद भाव से परे
है..
हम तो बस यही आशा करते है की
एक लम्हे बाद, ” औरत से ही इस
देश का विकास है” ये बात भी इन
महापुरषों को आजाएगी याद।