लाल, काला और सफेद.

लाल, काला और सफेद!


रंग हमेशा दूसरो को महत्त्व देते है..
पर वो अपने आप ही बेरंग होते है..
कुछ रंग हमारे हृदय को छू लेते है..
पर कुछ ऐसे होते है जो दिलों में
नफ़रत भर देते है।

रंग हो लाल तो उसी से सुहागन होने
की निशानी होती है..
पर वहीं रंग सफेद हाेजाए तो उसे
कई परेशानी होती है..
सुहाग के लाल सिंदूर की रेखा तक
ही सीमित उसकी जवानी होती है..
और जो सिंदूर ना हो तो बस खतम
उसकी कहानी होती है।

काला रंग जो है वो चुनौतियों से भरा है..
उसकी मन्हुसियत से यहां हर कोई डरा है..
पर काला रंग ताकत का भी प्रतीक है, ये
वाक्य भी बिल्कुल खरा है..
काला रंग लोगो में हिम्मत जगाता है..
नकारात्मक ऊर्जा को दूर भगाता है..
जो माँ लगा दे बच्चो को काला टीका,
तो उसे वो हर बुरी नजर से बचाता है।

सफेद रंग हर किसी का खास होता है…
उसी से तो शांति का आभास होता है..
एक विधवा के सुने पन को दर्शाता है वो..
मंत्री जो पहने ये रंग, तो धन उनपे बरसाता
है वो..
सफेद रंग को मासूमीयत का प्रतीक भी
बोला जाता है..
किन्तु इसी रंग के बलबूते पर एक औरत के कूवारे पन को भी तोला जाता है।

ज़िन्दगी का सार ही है लाल, काला और सफेद..
इसी में हमारी ढेर सारी अच्छी और बुरी यादें है कैद..
इन्हीं रंगो से है हमे कई अनचाही बातों का खेद..
ये तीन रंगो में ही बसे है ज़िन्दगी के अनेक भेद..
ज़िन्दगी का सच ही है लाल, काला और सफेद।

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